Tuesday, September 1, 2009
हाँथ उठाओ ..............
हम उस देश मे जी रहे है , जहाँ छोटी सी गली से लेकर देल्हीतक हज़ार तरह के कोहराम मचे है ! एइसे मे कुछ भी कहने का मतलब ? पर क्या करे, इस मुल्क की तरह हम भी मजबूर है ,जो चुप नही रह सकते ! मै कुछ नया नही कह रहा हूं जो बार-बार कहा जा चुका है बस उस की ही याद दिला रहा हूँ , आपको यह सोचकर कभी हैरत नहीं होती की धरती पर भारत एक ही देश है जिश पर सबसे ज़्यादा महापुरुसो ने जन्म लिया है , मानब जाती के इतिहास मै और कहीं नहीं , लेकिन आज सबसे दीनहीन और कमज़ोर कौमों के साथ हम खड़े है जिस देश का संबिदान से लेकर शिक्षा तकनीक और साइंस तक सब कुछ उदार का हो क्या उसे प्रगति कहा जाएगा कभी हमारा साइंस और दर्शन दुनिया की शिखर पर था लेकिन जैसे शिखर से ghati में गिरना एक नियम है बैसे ही हिंदुस्तान के पतन की कहानी है दरअसल एक हज़ार साल की लगातार गुलामी ने इस देश का आत्म विस्वास छीन लिया साथ ही मनोवैघ्यानिक रूप से भी कमज़ोर कर दिया १९४७ में आज़ादी के बाद भी हमारे नेता देश का आत्म सम्मान पैदा नही कर पाए लिहाज़ा आपनी जरों से टूट चुका देश नक़ल के रस्ते पर चल पड़ा आज दुनिया में हिंदुस्तान एक ऐसा अद्कचरा समाज है जिस के पास अपना कुछ भी नही और तो और हमारे सोचने का ढंग भी उदारु है हमारे समाज में दो तरह के लोग है पहले जो पश्चिम को आदर्श मानकर हवाई दुनिया में जी रहे है तो दुसरे जो रोटी की चिंता में खो कर देश के लिए सोच ही नही पाते ! शायद इसीलिए कोई बदलाव के बारे मै सोचता नही है ! देश में कई महापुरुष पैदा हुए जो पुरी जिंदगी मुल्क के लिए ही काम करते रहे! पर क्या लोग और समाज बदल पाया! नही ! हम उसी तरह आँख बंद करे सालों से जिए चले जा रहे है बिना इस बात की परवाह किए की हम में और दुनिया में कोई मेल ही नही रह गया ! जरा गौर से सोचिये हम किस तरफ़ जा रहे है !
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