Sunday, August 30, 2009
कितने जिन्ना ......... भाग 2
......... जिन्ना क्या थे और क्या नहीं उससे आज के हिन्दुस्तानी को सिर्फ़ इतना लेना देना है, की उनके समय के नेताओं ने जो बीज बोए उनको हम काट रहे है ! फ़िर और भी गम है ज़माने मे जिन्ना के सिवा , हमारे नेताओं को गरीबी आतंकबाद बुख्मारी और इसे तरह की और बातें नही दिखतीं जो मुल्क के आम आदमी का खून रोज चूस रही है ! कभी किसे नेता ने कोई एसे किताब नहीं लिखी जिसमे हिंदुस्तान के गरीबों के बारे मे कुछ लिखा हो, कभी हमारे बोटो पर एअश करेवालों को इस बात ने बेचीन नहीं किया के दाल के भाब क्या है , इस देश मे केजी क्लास मे बच्चे का दाखिला कराने के लिए भी सिफरिएस की ज़रूरत होती है एक बाल्टी पानी के लिए मेरे देश का आम आदमी घंटों कतार मे खड़ा रहता है ! दूर गओवों मे बिजली का इतजार इसा हो ता है जैसे अंधे के लिए आखों का , बढे सहरों मे घर से निकलता आदमी आतंक के धमाकों से डरता है तो छोटे कस्वो मे गुंडों और पुलिसवालों से , पर हमारे महान सोओचवाले नेताओं के लिये सायद यह कोई किताब लिखने का मुद्दा थोड़े ही है। सही भी है आम आदमी पर लिखी किताब भला कोई हजारों लाखों मे थोड़े ही बिकेगी ! उसके लिए तो बड़े लोग चाहिए फ़िर मे सोचता हूँ के आख़िर कितने जिन्ना इस मुल्क मे जिंदा है, वो एक जिन्ना था जिसने एक बंटवारा कराया , अब तो लोग कई -कई नामों पर बाँट रहे है , तो क्या जिन्ना को मरा माना जे या फिर जिन्ना अभी और भी है ! क्या आप इस पर सोओच रहे है !
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