Monday, August 24, 2009

ये इन्सान है .............

पल पल रंग बदलता है ! इन्सान को रंगिनिया बहुत पसंद है ! इसलिए ग्रिगेत सा लगता है ! बन्दर की तरह गुलातिया मरता है बिल्ली की तरह नोचता है कुत्ते की तरह भोक्ता भी है हलाकि उसमे बफादारी नही रही ! सीधी सी बात ये है की बांकी सबकुछ है इन्सान के अलाबा !एक खास बात और की जबतक चोरी ना पकडाये हर आदमी साहूकार है ! पर इन्सान की इन हरकतों के कारन इंसानियत शर्मशार हो रही है ! बड़े बड़े अपराध हो रहे है और उनकी रोकथाम के लिए भी अपराधी ही तेनात हैंमेरे कहने का सीधा सा अभिप्राय ये है की खुदा की rah से भटका इन्सान आज अपनी फितरत से भटक कर जानबर बन गया है ! किशी ने इस्वर का बेटा कहा तो किशी ने आदमी का रिश्ता बंदरो से जोड़ दिया ! ऐडम और एब के दौर से गुजरकर मसिनो के ज़माने तक सब बदला इन्सान भी ! पर यहाँ तक आते आते आदमी ने कुदरत को भी आपना दुश्मन बना लिया अपने को दुनेया का निर्माता समझने वाला आज बिनाश की चोटी पर जा बैठा पर मेरे यह सब कहने का मतलब क्या है ! क्या आप यह सब नहीं जानते ?

4 comments:

  1. Anek shubhkamnayen!
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